पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने आज रविवार को सुबह अपने सीकर स्थित निजी आवास पर कार्यकर्ताओं से मिले और जनसुनवाई की। जनसुनवाई के दौरान लक्ष्मणगढ़ विधानसभा के मंगलुना के ग्रामीणों ने मंगलूना में ट्यूबवेल बनवाने, इंटरलॉक सड़क व दो बड़ी स्ट्रीट लाइट स्वीकृत करवाने पर पीसीसी चीफ एवं लक्ष्मणगढ़ विधायक डोटासरा का मिठाई खिलाकर आभार जताया। इसके साथ ही आमजन ने अपने क्षेत्र की समस्या के सामने रखी जिस पर डोटासरा ने जल्द समस्या का समाधान करने का लोगों को आश्वासन दिया। पीसीसी चीफ डोटासरा ने बड़ा बयान देते हुए प्रदेश में सरकारी कॉलेज में संविदा पर लगाई जा रहे शिक्षकों को लेकर सरकार को घेरा। वहीं डोटासरा ने गंगानगर विधायक जयदीप बिहानी और अधिकारी के बीच जनसुनवाई के दौरान हुई कथित मारपीट मामले में भी सरकार पर जमकर निशान साधा। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि भाजपा की सरकार जब से सत्ता में आई है तब से सरकारी नौकरियों के प्रति बहुत ही संकुचित विचार रखती है। केवल भाषण और जुमले देकर सरकार सत्ता में तो आ गई लेकिन इन्होंने कोई भी नई भर्ती नहीं की। आज कॉलेज एजुकेशन में 40% से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। सरकार स्थायी भर्ती नहीं करने की बजाय संविदा पर भर्ती कर रही है और वह भी बेसिक पे के आधे में। मतलब 57 हजार का जो बेसिक पे है उसका आधा करीब 28 हजार रुपए दिए जाएंगे। जब हमारी कांग्रेस की सरकार थी तो संविदाकर्मियों को नियमित करने के लिए नियम बनाएं,कानून बनाए। लेकिन उसका उपयोग नहीं करके सरकार संविदा पर भर्ती ले रही है। मेडिकल डिपार्टमेंट में जो संविदा पर पद थे उन्हें नियमित करने की बजाय समाप्त ही कर दिए। सरकार में कोई सुनने वाला नहीं है। पेट्रोल, डीजल और कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। कल का रिजल्ट देख लीजिए उसके बाद दाम और ज्यादा बढ़ जाएंगे। अब तो हद हो गई जब सरकार का ही एक विधायक कह रहा है कि मुझे अधिकारियों ने पीटा। अधिकारी कह रहे हैं कि विधायक और उसके गुर्गों ने मुझे पीटा। अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो गई लेकिन विधायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। दर्ज करवाने के लिए कोर्ट जाना पड़ रहा है,यह कौन सा न्याय का मॉडल है भजनलाल जी। मुख्यमंत्री का इसमें कोई अधिकृत बयान नहीं आया। यदि हम किसी अपराध या सरकार के कुशासन पर कोई ट्वीट करते हैं, बयान देते हैं तो आप अपने मंत्रियों को,संगठन के लोगों को बोलते हो कि उनके बयान का खंडन करो। कांग्रेस पर अनर्गल आरोप लगने लग जाओ, अब हमारा सवाल है कि श्रीगंगानगर में जो भी विधायक के साथ हुआ या फिर विधायक ने जो दलित अधिकारी के साथ किया। दोनों के मुकदमे दर्ज करके निष्पक्ष अधिकारी के द्वारा सरकार को जांच करवानी चाहिए। दोषियों को सलाखों के पीछे करना चाहिए। अब अधिकारी तो कोर्ट में गुहार लगा रहे हैं और विधायक कह रहे हैं कि मेरे साथ मारपीट हुई। दोनों ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थितियां है। यदि सत्ता पक्ष के विधायक के साथ मारपीट हुई है तो इसका मतलब है कि इकबाल खत्म हो गया। अगर उस दलित अधिकारी को पीटा गया, उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हो रही तो यह फिर कुशासन की पराकाष्ठा है। शासन और सुशासन भूल जाइए क्योंकि वह केवल बीजेपी के भाषण में अच्छा लगता है। एक अधिकारी जिसके आंख में चोट आई और उसे पीटा गया, उसकी रिपोर्ट भी दर्ज नहीं हो रही। इस मामले में स्थानीय सपा का अधिकृत बयान आना चाहिए जिसमें वह बताए कि मामले की यह हकीकत है। आज तक यह अबूझ पहेली हो रही है,गुत्थी है जो सुलझ नहीं रही। सरकार हर मामले में विफल रही है। गर्मी प्रचंड है लेकिन पानी की व्यवस्था की मुख्यमंत्री को कोई चिंता नहीं है। युवा बेरोजगार घूम रहे हैं,सरकार को नौकरियों की कोई चिंता नहीं है। संविदाकर्मियों का मामला बेहद गंभीर है क्योंकि उन्होंने इसलिए वोट दिया था कि कांग्रेस सरकार ने संविदाकर्मियों के नियमन का रूल बनाया था,लेकिन नियमित हो नहीं पाए तो हो सकता है कि बीजेपी की सरकार आने के बाद हमें नियमित कर देगी।
डोटासरा बोले अभी होमगार्ड की 3800 पदों पर भर्ती हुई। इसमें खुलेआम 4 से 5 लख रुपए में पद बिके हैं। यह ऐसी नौकरी है जिनको पूरे 365 दिन काम नहीं मिलता। उसके अंदर भी भ्रष्टाचार हो रहा है। जिस्म भी पैसे लेकर नियुक्ति देने की बात की जा रही है। इस बात की जवाबदेही किसकी होगी। सरकारी इस मामले में अपनी बात स्पष्ट नहीं करती तो कौन करेगा। ऐसे तो सरकार बड़ी-बड़ी डींगे हांकती है कि भ्रष्टाचार का जीरो टॉलरेंस है,आप बताएं वह है कहां। यदि होमगार्ड की नौकरी भी बिक गई तो आप किस मुंह से कह रहे हो कि कांग्रेस के शासन में नौकरियां नहीं दी गई,घोटाले हो गए। आपके यहां तो सरेआम पद बिक रहे हैं,संविदा पर नौकरियां नहीं दी जारी। हमारी सरकार रिटायरमेंट होने वाले कर्मचारियों को सेम डे पेंशन देती थी लेकिन अब उन्हें 6-6 महीने तक पेंशन नहीं मिल रही।
डोटासरा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने सत्ता को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सभी संवैधानिक संस्थाओं CRPF,CISF,NIA आदि का दुरुपयोग किया गया। मैंने कहीं पढ़ा था कि 70 हजार से ज्यादा तो पुलिस के पहरेदार लगे हुए हैं। सारे IAS,ED,इनकम टैक्स के अधिकारी वहां पड़े हैं। जो राजनेता चुनाव लड़ रहा है उसके घर पर ED, इनकम टैक्स वाले बैठे हैं। माइनॉरिटी के मोहल्लों में वोट नहीं डालने दिए गए। फिर भी हवा यह आ रही है कि मोदी वहां पर हार रहे हैं।
बाइट – गोविंद सिंह डोटासरा
पीसीसी चीफ, राजस्थान।






