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NSS विशेष शिविर के छठे दिन स्वास्थ्य-सुरक्षा जागरूकता ने दी नई दिशा: नेत्र स्वास्थ्य से बिजली करंट बचाव तक दिया विस्तृत मार्गदर्शन

By सुशील कुमार जोशी जयपुर—————————————

जयपुर   राजकीय महाविद्यालय कोटखावड़ा में चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के सात दिवसीय विशेष शिविर के छठे दिन  स्वास्थ्य एवं सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनु शंकर शर्मा और सेवानिवृत्त कनिष्ठ अभियंता  विनोद शर्मा ने छात्रों को आंखों की देखभाल से लेकर बिजली के करंट से बचाव तक की महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। NSS स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम में भाग लिया, जो इस शिविर के सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य को साकार कर रहा है।

 

यह शिविर स्थानीय समुदाय की सेवा और युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने के लक्ष्य से आयोजित किया गया है। छठे दिन का यह सत्र न केवल छात्रों के लिए उपयोगी रहा, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित सैकड़ों स्वयंसेवकों ने व्याख्यानों को  सुना और सवाल-जवाब सत्र में  भागीदारी की। NSS के इस प्रयास से छात्रों में स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ी है, जो आने वाले समय में दुर्घटनाओं को रोकने में सहायक होगी।

नेत्र स्वास्थ्य जागरूकता: आधुनिक जीवनशैली के खतरों से सावधान

 


कार्यक्रम का पहला सत्र नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनु शंकर शर्मा ने संबोधित किया। उन्होंने आंखों की देखभाल को जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग आंखों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। डॉ. शर्मा ने विस्तार से बताया कि कंप्यूटर विजन सिंड्रोम (CVS) एक सामान्य समस्या है, जिसमें लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर या टीवी देखने से आंखों में जलन, सिरदर्द, धुंधलापन और सूखापन हो जाता है।

उन्होंने 20-20-20 नियम पर जोर दिया, जो बेहद सरल लेकिन प्रभावी है। इसके अनुसार, हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर की वस्तु को देखना चाहिए। यह नियम आंखों की मांसपेशियों को आराम देता है और थकान को कम करता है। डॉ. शर्मा ने मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) की समस्या पर प्रकाश डाला, जो बच्चों और युवाओं में तेजी से बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां नेत्र परीक्षण की सुविधाएं कम हैं, वहां यह समस्या और गंभीर हो जाती है। उन्होंने आंखों की एलर्जी के लक्षणों जैसे लालिमा, खुजली और पानी गिरना बताए और बचाव के उपाय सुझाए, जैसे धूल से बचना, साफ-सफाई रखना और एंटी-एलर्जिक आई ड्रॉप्स का उपयोग।

नेत्रदान के महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि एक नेत्रदान से दो लोगों की आंखें रोशन हो सकती हैं। भारत में हर साल लाखों लोग आंखों की बीमारियों से जूझते हैं, लेकिन नेत्रदान के अभाव में कई अंधे रह जाते हैं। उन्होंने समय-समय पर नेत्र परीक्षण की सलाह दी और शिविर में मौजूद छात्रों को प्रेरित किया कि वे अपने परिवार और गांव वालों को भी जागरूक करें। स्वयंसेवकों ने डॉ. शर्मा के व्याख्यान पर तालियां बजाईं और कई ने व्यक्तिगत सलाह भी ली। यह सत्र न केवल जानकारीपूर्ण था, बल्कि छात्रों के व्यवहार में बदलाव लाने वाला भी सिद्ध हुआ।

बिजली करंट से बचाव: घर-बाहर सुरक्षित रहने के टिप्स
कार्यक्रम के दूसरे हिस्से में सेवानिवृृत्त कनिष्ठ अभियंता  विनोद शर्मा ने बिजली के करंट से जुड़ी दुर्घटनाओं पर प्रकाश डाला। राजस्थान जैसे ग्रामीण इलाकों में बिजली की अनियमित आपूर्ति और पुराने तारों के कारण ऐसी घटनाएं आम हैं।  शर्मा ने घरेलू और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली दुर्घटनाओं के उदाहरण दिए, जैसे गीले हाथों से स्विच छूना, क्षतिग्रस्त वायर का उपयोग या बिजली के खंभों के पास लापरवाही।

उन्होंने सुरक्षित विद्युत उपकरणों के उपयोग पर जोर दिया। उदाहरणस्वरूप, ISI मार्क वाले प्लग और स्विच का इस्तेमाल करें, वायरिंग नियमित जांच करवाएं और बच्चों को बिजली के उपकरणों से दूर रखें। आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार के तरीके बताते हुए उन्होंने CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) विधि का विस्तृत प्रदर्शन किया। CPR से बिजली झटके के शिकार व्यक्ति का दिल-फेफड़े सुचारू रखा जा सकता है। इसके अलावा, करंट से बचाव के लिए डंडा, सूखा कपड़ा, पेपर या चमड़े का उपयोग कैसे करें, यह प्रैक्टिकल तरीके से समझाया। उन्होंने चेतावनी दी कि कभी भी नंगे हाथों से करंट वाले व्यक्ति को न छुएं, वरना खुद भी शिकार हो सकते हैं।

शर्मा ने दुर्घटना में मुआवजा प्राप्त करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की। बिजली विभाग में FIR दर्ज करवाएं, मेडिकल रिपोर्ट संलग्न करें और जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से दावा करें। प्राथमिक उपचार में झुलसी जगह पर नीली स्याही या बरनोल लगाने की सलाह दी, जो दर्द कम करती है। स्वयंसेवकों ने इन टिप्स पर नोट्स लिए और कई ने घर लौटकर परिवार को बताने का वादा किया। यह व्याख्यान ग्रामीण विद्युतीकरण की वर्तमान चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बेहद प्रासंगिक था।

 

कार्यक्रम अधिकारी  बिन्नी साहू ने अतिथियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि NSS शिविर का उद्देश्य छात्रों को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर व्यावहारिक जीवन कौशल सिखाना है। यह शिविर कोटखावड़ा जैसे सुदूर क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने का माध्यम बनेगा।

प्राचार्य शिप्रा वर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए NSS  शिविर के इस  सत्र की  सराहना की। उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य और सुरक्षा जागरूकता ही एक स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त समाज की आधारशिला है। आज के व्याख्यानों से स्वयंसेवक न केवल अपनी दिनचर्या में सतर्कता अपनाएंगे, बल्कि अपने परिवार, गांव और समुदाय में भी इन  जानकारियों का प्रसार करेंगे।” इसके साथ ही, उन्होंने नेत्र स्वास्थ्य और बिजली सुरक्षा के विशेषज्ञों डॉ. मनु शंकर शर्मा तथा  विनोद शर्मा सहित सभी आए हुए अतिथियों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया गया, जिसमें स्वयंसेवकों ने  भागीदारी निभाई। प्राचार्य ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि यह शिविर प्रकृति संवर्धन का भी माध्यम बनेगा।

 

शिविर का व्यापक प्रभाव और भविष्य की योजनाएं
यह NSS विशेष शिविर राजकीय महाविद्यालय कोटखावड़ा की एक बड़ी पहल है, जो 17 जनवरी से शुरू होकर 23 जनवरी तक चलेगा। पिछले पांच दिनों में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर काम हुआ। छठे दिन का यह कार्यक्रम छात्रों को सशक्त बनाने के साथ-साथ समुदाय को मजबूत कर रहा है। स्थानीय निवासियों ने भी सराहना की और भविष्य में ऐसे और कार्यक्रमों की मांग की।

 

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