विकाश कनवा उदयपुरवाटी
झुंझुनू उदयपुरवाटी निकटवर्ती प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ स्थल लोहार्गल धाम स्थित वेंकटेश बालाजी मंदिर परिसर में स्वामी संत दास महाराज की नवी पुण्यतिथि बड़े ही हर्षोल्लास, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई गई। दिनभर मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल रहा और दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने महाराज श्री की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
वेंकटेश बालाजी मंदिर के महंत एवं लोहार्गल धाम पीठाधीश्वर स्वामी अश्वनी दास महाराज ने बताया कि नवी पुण्यतिथि के अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-संकीर्तन का आयोजन किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता बालाजी मंदिर परिसर में लगा रहा। पुण्यतिथि आयोजन के अंतर्गत सर्वप्रथम महाराज की समाधि स्थल पर समाधि पूजन संपन्न हुआ, जिसमें संत समाज के विद्वान महंतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-पाठ किया। स्वामी अश्वनी दास महाराज ने जानकारी देते हुए कहा कि चरण पादुका पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर संत दास महाराज के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके पश्चात गुरुचरण आरती एवं कीर्तन कार्यक्रम संपन्न हुआ। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय गुरुदेव”, “बालाजी महाराज की जय” जैसे भक्ति नारों से गूंज उठा। इस अवसर पर स्थानीय सहित प्रदेश के अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।

पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित कीर्तन कार्यक्रम में भजन मंडलियों ने संत दास महाराज की भक्ति, सेवा और साधना पर आधारित भावपूर्ण भजन प्रस्तुत किए, जिनसे उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। आरती और कीर्तन के बाद प्रसादी वितरण का कार्यक्रम भी रखा गया। दोपहर से प्रारंभ हुआ प्रसादी का कार्यक्रम देर शाम तक चलता रहा, जिसमें सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
स्वामी अश्वनी दास महाराज ने बताया कि संत दास महाराज ने अपने जीवनकाल में लोककल्याण और मानव सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया। वे संत परंपरा के ऐसे महामनीषी थे, जिन्होंने लोहार्गल क्षेत्र में अध्यात्म और भक्ति की अलख जगाई। उनकी शिक्षाओं और आशीर्वचनों से आज भी श्रद्धालु प्रेरित होते हैं। पुण्यतिथि पर उपस्थित भक्तों ने उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, पुण्यतिथि आयोजन के लिए परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था। फूलों की मालाओं और रोशनी से सजाए गए मंदिर में श्रद्धालुओं ने दिनभर दर्शन किए। स्थानीय स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराने में विशेष योगदान दिया। वातावरण में भक्ति रस व्याप्त था और हर ओर “गुरुदेव की जय” के जयकारे गूंजते रहे।

कार्यक्रम के समापन पर स्वामी अश्वनी दास महाराज ने उपस्थित भक्तों को धार्मिक एकता और सेवा भाव की प्रेरणा दी तथा महाराज के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।







